तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना: सुलतानपुर14 फरवरी। 11 नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें - क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से। - क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में। - क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो का भुगतान सम्बन्धी विवरण। - क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण भुगतान का विवरण एवंसम्बन्धित नियमावली। - क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा... SC to appeal before itself on RTI row: New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act. - The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI. - The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary. - source :... जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति: नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी। - प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया। -... फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल: नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है। - आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से... निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में: निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर - एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय - हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। - एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़... कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति: शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। - डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित... 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.: महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी. - कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का... आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया: सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके। - इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू... राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ पुस्तिका का विमोचन किया: सूचना के अधिकार से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा - राज्यपाल - उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन के गांधी सभागार में ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिष्ट, श्री विजय शंकर शर्मा, श्री पारसनाथ गुप्ता, श्री स्वदेश कुमार, श्री सैय्यद हैदर अब्बास रिज़वी, श्री हाफिज उस्मान, श्री राजकेश्वर सिंह, श्री गजेन्द्र यादव तथा उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश गर्ग, राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीर कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सहित अनेक गणमान्य...

Archive | March, 2010

न्यायालय की तरह कार्यवाही करने के निर्देश – आयोग

Posted on 19 March 2010 by admin

देहरादून -राज्य सूचना आयोग ने प्रदेश के सभी प्रशासनिक अधिकारियों को सूचनाधिकार की प्रथम अपील की सुनवाई न्यायालय की कार्यवाही की तरह करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अपील की सुनवाई के तौर तरीकों से खफा मुख्य सूचना आयुक्त डा. आर.एस टोलिया ने इस मामले में सचिव सामान्य प्रशासन को प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों आदि को निर्देश जारी करने के आदेश दिए हैं।

सूचनाधिकार के एक प्रकरण में आयोग ने कहा है कि इन अधिकारियों द्वारा जिस तरह अन्य अधिनियमों के तहत वादों व अपीलों की सुनवाई होती है, उसी तरह सार्वजनिक वाद सूची नोटिस बोर्ड पर समय व दिनांक तय करते हुए प्रदर्शित की जाए।

दून निवासी एक व्यक्ति ने अगस्त  2009 में जिला सूचना अधिकारी कार्यालय से पिछले साल डी.एम कार्यालय के स्टाफ के हड़ताल व उसमें शामिल कर्मियों के बारे में अनेक जानकारियां मांगी। उन्होंने तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों पर रोक से जुड़ी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से की गई अब तक की कार्रवाई और समाचार पत्रों, चैनलों को दिए गए निर्देशों के बारे में भी जानकारी मांगी। जब उन्हें तंबाकू संबंधी सूचना नहीं मिली तो उन्होंने जिलाधिकारी से प्रथम अपील की। निस्तारण से असंतुष्ट होकर उन्होंने सूचना आयोग में अपील कर दी। सुनवाई का दिन तय हो जाने के बावजूद उन्हें सूचना नहीं मिली।

आयोग ने इस मामले में प्रथम विभागीय अपील की सुनवाई के प्रति असंतोष व्यक्त किया और कहा कि जब कार्यवाही जारी हो तो लोक सूचना अधिकारी को इसकी जानकारी अपीलार्थी को भी देनी चाहिए। आयोग ने विभागीय अपील अधिकारी यानी जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वह अपने कोर्ट की कार्यवाही की तरह गंभीरता से सूचना अधिकार की प्रथम अपील की सुनवाई करें।

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फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल

Posted on 19 March 2010 by admin

नई दिल्ली – सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है।

आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से यह जानना चाहा था कि क्या उसने केन्द्रीय गृहमन्त्रालय को पद्म पुरस्कारों के सिलसिले में कोई समिति गठित करने का निर्देश दिया है। शीर्ष न्यायालय ने उन्हें यह जानकारी देने से इनकार कर दिया।

देवदत्त कामत इसी मामले में सीआईसी में सुप्रीम कोर्ट का पक्ष रख रहे थे। कामत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने पद्म पुरस्कारों के बारे में निर्णय लेने के लिए विख्यात लोगों की एक समिति गठित करने का सुझाव दिया। मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि देवदत्त कामत ने आरटीआई आवेदक के सवाल का जवाब दे दिया है।

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सूचना उपलब्ध न कराने पर सिटी मजिस्ट्रेट ईओ को तलब किया

Posted on 18 March 2010 by admin

हरिद्वार – जन सूचना अधिकार(आईटीआई) के तहत सूचना उपलब्ध न कराने पर मुख्य सूचना आयुक्त आर.एस टोलिया ने पालिका के लोक सूचना अधिकारी (ईओ) बी.एल. आर्य एवं अपीलीय अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट अर्चना गहरवार को नोटिस भेजकर समस्त पत्रावलियों सहित तलब किया है।

आरोप है कि पालिकाध्यक्ष ने चयन समिति के बिना ही वर्ष 2008 में छह कर्मचारियों को प्रोन्नति देकर प्रथम श्रेणी लिपिक और दो दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर दिया था। कुछ कर्मचारियों ने शासन में इसकी शिकायत भी की थी। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने जांच कराई और शासन को भेजी रिपोर्ट में प्रोन्नति व नियमित नियुक्तियों को शासनादेश के विरुद्ध करार दिया।

इस जांच के आधार पर सभासद दिनेश जोशी ने ईओ से सूचना अधिकारी के अन्तर्गत प्रोन्नति व नियमितीकरण केे सम्बंध में शासनादेश की प्रति उपलब्ध कराने का आवेदन किया। लेकिन पालिका के लोक सूचना अधिकारी बी.एल. आर्य ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई। सभासद ने नगरपालिका की अपीलीय अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट अर्चना गहरवार के समक्ष अपील की। सिटी मजिस्ट्रेट ने तीन दिन में शासनादेश की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे लेकिन दो माह तक भी ईओ ने आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद आवेदक राज्य सूचना आयोग में गया और आयोग ने 21 अप्रैल को दोनों को तलब किया है।

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सूचना का अधिकार अधिनियम पर प्रदेश विधायिका के सदस्यों के मन्तव्य,विषय पर सेमिनार 20 मार्च को

Posted on 18 March 2010 by admin

लखनऊ –  नेशनल आर0टी0आई0 फोरम, आर0टी0आई0 एक्ट तथा आर0टी0आई0 कार्यकर्ताओं से जुड़े तमाम पहलुओं पर काम करने वाला एक संगठन है, जिसमें सूचना के अधिकार का व्यापक प्रचार-प्रसार भी सम्मिलित है।
इस फोरम द्वारा दिनांक 20/03/2010 को आई0आई0एम0 लखनऊ में 11 बजे पूर्वाह्न से 1 बजे अपराह्न के मध्य एक सेमिनार आयोजित किया गया है।

इस सेमिनार का विय है-  सूचना का अधिकार अधिनियम पर प्रदेश विधायिका के सदस्यों के मन्तव्य। श्री चन्द्र प्रकाश, गौरीगंज, अनूप साण्डा, सुल्तानपुर, विवेक सिंह, बान्दा, वीरेन्द्र कुमार, अहिरौरी, बृजेश सौरभ, गरवारा, यशवन्त सिह तथा जय प्रकाश चतुर्वेदी एम0एल0सी0 इस सेमिनार में सम्मिलित होंगे।

इसके अंर्तगत प्रमुख रूप से विधायकों द्वारा अपना मन्तव्य प्रस्तुत किया जायेगा जिसके पश्चात् प्रश्नोत्तरी का समय होगा। इसके अतिरिक्त आई0पी0एस0 अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा आर0टी0आई0 के विविध पहलुओं पर एक प्रस्तुतिकरण दिया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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बुन्देलखंड में 18 दिन में खर्च होंगे 86 करोड़ रुपये

Posted on 17 March 2010 by admin

झांसी – चालू वित्त वर्ष के 11 माह में 5 अरब 52 करोड़ खर्च होने के बाद भी बुन्देलखंड की तस्वीर भयावह बनी हुई है। रोजी-रोटी की तलाश में लाखों लोग परदेश पलायन कर रहे हैं। बुन्देलखंड के सात जनपदों- बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, उरई, जालौन, ललितपुर व झांसी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महानरेगा) के अन्तर्गत चालू वित्त वर्ष में 6 अरब 38 करोड़ रुपये मिले थे। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 28 फरवरी तक 5 अरब 52 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

86 फीसदी धन खर्च होने के बाद 54 फीसदी कार्य अधूरे पड़े हैं। चित्रकूट मंडल के बांदा में 82 करोड़ रुपये में से 81 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसी तरह चित्रकूट में 90 में से 61 करोड़ रुपये, महोबा में 59 में से 49 करोड़ रुपये व हमीरपुर में 104 में से 91 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इस प्रकार 53 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने में बची पड़ी है। झांसी मंडल के झांसी ने 101 करोड़ में से 87 करोड़ रुपये, ललितपुर ने 80 करोड़ रुपये में से 67 करोड़ रुपये व उरई तथा जालौन ने 122 करोड़ में से 101 करोड़ रुपये खर्च किए।

यहां के तीन जनपदों में 33 करोड़ रुपये बचे हुए हैं। समूचे बुन्देलखंड में प्रस्तावित कायरें पर नजर डालें तो बांदा में 1384 कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। चित्रकूट में 847 पूरे और 2057 अधूरे, हमीरपुर में 1153 पूरे व 1641 अधूरे, महोबा में 940 पूरे व 1187 अधूरे हैं।

इसी प्रकार झांसी में 3303, उरईज़ालौन में 3638 व ललितपुर में 2011 कार्य अधूरे पड़े हैं। यह सरकारी आंकड़े हैं। समाजसेवी नसीर अहमद ने इन आंकड़ों को बुन्देलखंड के सातों जनपदों से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत हासिल किए हैं। शेष बची 14 प्रतिशत रकम यानी 86 करोड़ रुपये से अधूरे पड़े 54 फीसदी कार्य को 31 मार्च तक पूरा करने की होड़ मची हुई है।

इतनी कम राशि में आधे से ज्यादा अधूरे कार्य किसी जादू-मंतर से ही पूरे किए जा सकते हैं। कागजों की बाजीगरी में यहां का प्रशासन सुर्खियों में रहा है। अपनी तिकड़म से इसने एक साल में 51 हजार शिक्षित बेरोजगार घटाएं हैं। तल्ख सच्चाई यह है कि सूखे का दंश झेल रहे बुन्देलखंड की तस्वीर भयावह होती जा रही है। लाखों की तादाद में मजदूर पलायन कर गए हैं।

चित्रकूट मंडल के आयुक्त ओ.पी.एन. सिंह ने बताया कि सभी जिला अधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों को तेजी से कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। सीडीओ बांदा हीरामणि मिश्रा ने कहा कि महानरेगा के कार्यो में तेजी लाई गई है।

झांसी के संयुक्त विकास आयुक्त ओ.पी. वर्मा ने बताया कि 8 मार्च को लखनऊ में हुई महानरेगा की बैठक में झांसी, जालौन व ललितपुर को क्रमश 40 हजार, 45 हजार व 39 हजार रुपये, प्रतिदिन लेबर चार्ज दिए जाने का लक्ष्य दिया गया है। ललितपुर का कार्य संतोषजनक है, झांसी व जालौन को लक्ष्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। मजदूरों के पलायन पर वे कहते हैं कि 100 दिनों का रोजगार नाकाफी है। लोग रोजी-रोटी की तलाश में परदेश तो जाएंगे ही।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
E-mail :editor@bundelkhandlive.com
Ph-09415060119

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Gujarat gets two new RTI commissioners

Posted on 14 March 2010 by admin

The Gujarat State Information Commission (GSIC), which was functioning only with a chief information commissioner so far, has got two new information commissioners following the high court’s intervention.

The new information commissioners are Netra Shenoy and Arvind Shukla. They have been appointed to help out Chief Information Commissioner R.N. Das.

Shukla is an Indian Administrative Service (IAS) official of the 1983 batch who retired as principal secretary to the governor, while Shenoy belongs to the 1969 batch and retired as additional chief secretary, planning department.

The appointments Friday evening follow the intervention of the Gujarat High Court on a public interest litigation (PIL) last year wherein the state government was directed to finish the process of recommending names to the governor within two months.

The file of names for approval had been lying with Chief Minister Narendra Modi. The Right to Information Act was passed in 2005.

However, all three RTI officials are slated to hang their boots over the next two years following the stipulation to serve only upto 65 years of age. Shukla retires in November 2012 and Shenoy and Das in 2011.

H. Pandya, member of the Mahiti Adhikar Gujarat Pahal(MAGP), said Saturday that there was need to appoint regional information commissioners so that people do not have to travel long distances to approach it.

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जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति

Posted on 13 March 2010 by admin

नई दिल्ली – सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया।

अग्रवाल ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की पदोन्नति के प्रस्ताव को विधि मन्त्रालय द्वारा कोलेजियम को लौटाने के परिप्रेक्ष्य में यह जानकारी मांगी थी। प्रथम अपीली प्राधिकार तथा संयुक्त सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने आवेदनकर्ता को सूचित किया कि ऐसी कोई सूची रखने की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा इस बारे में कोई सूचना नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है कि किसी अन्य प्राधिकार के पास ऐसी सूचना है अथवा नहीं।

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भारी पड़ीं पारदर्शिता

Posted on 13 March 2010 by admin

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पांच माह बाद पूछा कि सूचना क्या चाहिए?

Posted on 11 March 2010 by admin

सूचना के अधिकार को लेकर मचाए जा रहे हो हल्ले के बीच सरकार के आला अफसर सूचना देने में भी गलियां निकालने में लगे हैं। जोधपुर के एक आवेदक ने प्रमुख शासन सचिव (पीएचईडी) से आरटीआई के तहत कुछ जानकारी मांगी थी। उसे पांच माह तक तो टरकाया जाता रहा। बाद में कहा गया कि वह कार्यालय में आकर बताए कि उसे क्या सूचना चाहिए। दरअसल, शहर के सरदारपुरा निवासी एनएल व्यास ने २६ सितंबर 0९ को आरटीआई के तहत लोक सूचना अधिकारी एवं प्रमुख शासन सचिव, पीएचईडी, जयपुर को आवेदन भेजा था। इसमें विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया सहित पांच जानकारियां मांगी थी। इस आवेदन पर शासन उप सचिव (प्रथम) ने 16 अक्टूबर को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग जयपुर के मुख्य अभियंता (मुख्यालय) को वांछित सूचनाएं अविलंब उपलब्ध करवाने व विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए।

इस पत्र को दो माह से अधिक समय तक फाइल में रखने के बाद मुख्य अभियंता (मुख्यालय) कार्यालय की ओर से अतिरिक्त मुख्य अभियंता (शहरी) जन स्वा. अभि. विभाग ने 22 दिसंबर को पत्र भेजा। इसमें कहा किया गया ‘प्रार्थी द्वारा चाही गई आंशिक सूचना तकनीकी सदस्य एवं तकनीकी सहायक-प्रथम से प्राप्त हो गई है। बिन्दु संख्या 2, 3, 4, 5 की सूचना प्रशासनिक विभाग से संबंधित होने के कारण प्रार्थी का पत्र आपको सूचना भेजने के लिए प्रेषित किया जा रहा है। आप शीघ्र सूचना उपलब्ध करावें, जिससे प्रार्थी को सूचना उपलब्ध करवाई जा सके।’ इसके करीब तीन माह बाद प्रमुख शासन सचिव, पीएचईडी कार्यालय को इस पत्र की याद आई। शासन उप सचिव (प्रथम) ने 3 मार्च 2010 को एक पत्र प्रार्थी को भेजते हुए लिखा कि संदर्भित आवेदन पत्र 26.09.09 द्वारा चाही जा रही सूचना स्पष्ट नहीं है। कृपया किसी कार्यालय दिवस में उपस्थित होकर वांछित सूचना स्पष्ट कर, प्राप्त करें

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हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Posted on 09 March 2010 by admin

नई दिल्ली – प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना का अधिकार  कानून के दायरे में बताने के दिल्ली हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती दी है। अपने समक्ष ही सोमवार को दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रधान न्यायाधीश कार्यालय की सूचनाएं संवेदनशील प्रकृति की होती हैं और उनके खुलासे से न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को नुकसान हो सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 जनवरी को दिए फैसले में प्रधान न्यायाधीश कार्यालय को आरटीआई कानून के दायरे में और वांछित सूचनाएं देने का ज़िम्मेदार बताया था।

प्रधान न्यायाधीश के.जी बालकृष्णन एवं अन्य न्यायाधीशों से सलाह-मशविरे के बाद दाखिल अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने हाईकोर्ट के फैसले को रद करने की मांग की है। इसमें तर्क दिया गया है कि संवैधानिक प्रक्रिया में न्यायाधीशों की भूमिका अनूठी है और उन्हें किसी भी तरह के बाहरी दबाव से बचाना जरूरी है। इसलिए न्यायाधीशों के आचरण को सार्वजनिक बहस का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। याचिका एक माह पहले ही तैयार कर ली गई थीए जिसे सोमवार को अधिव1ता देवदत्त कामत ने अदालत में पेश किया। अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवटी इसकी पैरवी करेंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट के  मुख्य न्यायाधीश एपी शाह की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया थाए जिसमें कहा गया था कि चीफ जस्टिस के कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने से न्यायिक स्वतन्त्रता का अतिक्रमण होगा। हाईकोर्ट ने कहा था कि न्यायिक स्वतन्त्रता किसी न्यायाधीश का निजी विशेषाधिकार नहींए बल्कि एक ज़िम्मेदारी है। यह फैसला प्रधान न्यायाधीश केजी बालकृष्णन के लिए झटके की तरह था जो कह रहे थे कि उनका कार्यालय आरटीआई के दायरे में नहीं आता है और वह न्यायाधीशों की संपत्ति के ब्योरे जैसी सूचनाएं साझा नहीं कर सकते। गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत के एक न्यायाधीश को छोड़कर प्रधान न्यायाधीश सहित अन्य न्यायाधीशों ने दो नवंबर 2009 को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति की घोषणा की थी।

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