तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना: सुलतानपुर14 फरवरी। 11 नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें - क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से। - क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में। - क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो का भुगतान सम्बन्धी विवरण। - क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण भुगतान का विवरण एवंसम्बन्धित नियमावली। - क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा... SC to appeal before itself on RTI row: New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act. - The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI. - The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary. - source :... जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति: नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी। - प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया। -... फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल: नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है। - आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से... निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में: निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर - एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय - हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। - एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़... कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति: शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। - डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित... 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.: महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी. - कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का... आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया: सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके। - इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू... राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ पुस्तिका का विमोचन किया: सूचना के अधिकार से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा - राज्यपाल - उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन के गांधी सभागार में ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिष्ट, श्री विजय शंकर शर्मा, श्री पारसनाथ गुप्ता, श्री स्वदेश कुमार, श्री सैय्यद हैदर अब्बास रिज़वी, श्री हाफिज उस्मान, श्री राजकेश्वर सिंह, श्री गजेन्द्र यादव तथा उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश गर्ग, राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीर कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सहित अनेक गणमान्य...

Archive | December, 2017

सूचना उपलब्ध न कराने के दोषी 19 जनसूचना अधिकारियों पर लगाया 4.60 लाख रुपये का अर्थदण्ड

Posted on 15 December 2017 by admin

लखनऊः 15 दिसम्बर 2017
राज्य सूचना आयुक्त श्री हाफिज उस्मान ने आरटीआई अधिनियम के तहत 19 अधिकारियों को सूचना न उपलब्ध कराने का दोषी मानते हुए 4.60 लाख रुपये का अर्थदण्ड लगाया है। आयोग ने इन अधिकारियों को कारण बताओं नोटिस जारी कर वादी को 30 दिन में सूचना उपलब्ध कराने को कहा था।
श्री उस्मान द्वारा उपलब्ध करायी गई सूचना के अनुसार इन अधिकारियों में जन सूचना अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, सम्भल पर 10,000 रुपये तथा अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, मुजफ्फरनगर, उपजिलाधिकारी तहसील शामली जनपद शामली, तहसीलदार तहसील बिलारी, मुरादाबाद, तहसीलदार चन्दौसी, सम्भल, उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद, मुरादाबाद, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, शामली, नगर नगम, मुरादाबाद, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुरादाबाद, जिला विकास अधिकारी, शामली, विकास प्राधिकरण, सहारनपुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सम्भल, जिला विद्यालय निरीक्षक, मुजफ्फरनगर, जिला समाज कल्याण अधिकारी, सहारनपुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर, सहायक विकास अधिकारी पंचायत विकास क्षेत्र कोतवाली, बिजनौर, खण्ड विकास अधिकारी विकास खण्ड मिलक, रामपुर, ग्राम पंचायत अधिकारी खमरिया, मिलक, रामपुर, ग्राम पंचायत अधिकारी पिन्डौरा जहांगीरपुर ऊन, शामली पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया है।
एक अन्य मामले में राज्य सूचना आयुक्त श्री हाफिज उस्मान ने पूर्णरूप से सूचना न देने वाले ग्राम पंचायत अधिकारी लिसाढ विकास खण्ड कांधला, शामली पर 5000 रुपये, अधिशासी अभियन्ता, विद्युत वितरण खण्ड खतौली, मुजफ्फरनगर पर 2,000 रुपये तथा बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी, सम्भल पर 1,000 रुपये का अर्थदण्ड लगाते हुए बतौर क्षतिपूर्ति वादी को कुल 8,000 रुपये (आठ हजार रुपये) दिलाया।

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मनमोहन काल के मुकाबले मोदी काल में दोगुनी दर से शहीद हो रहे वायु सैनिक!

Posted on 15 December 2017 by admin

सुरेन्द्र अग्निहोत्री ,लखनऊ/१४ दिसम्बर २०१७…………

किसी भी युद्ध में वायुसेना की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है और वायु
सेना की रीढ़ की हड्डी होते हैं वायु सैनिक और इसीलिये एक-एक वायु सैनिक
का जीवन अनमोल होता है पर क्या आप जानते हैं कि इस साल हमारे देश भारत की
वायु सेना ने कितने अनमोल वायु सैनिक गवां दिए हैं? नहीं न l तो चलिए अब
हम आपको इसकी सटीक जानकारी दिए देते हैं क्योंकि आबादी के हिसाब से देश
के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई
एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर भारत
के वायु सेना मुख्यालय ने संजय को जो जानकारी दी है उससे यह चौंकाने वाला
खुलासा हो गया है कि चालू साल २०१७ के शुरुआती १० महीने में ही पिछले ९
सालों के बराबर यानि कि १ जनवरी २००८ से ३१ दिसम्बर २०१६ तक के समय में
शहीद हुए वायुसैनिकों के बराबर वायुसैनिक शहीद हो गए हैं
देश में पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में काम
रहे चोटी के समाजसेवियों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते सितम्बर
महीने की ०४ तारीख को भारत के रक्षा मंत्रालय में एक आरटीआई अर्जी भेजी
थी l नई दिल्ली स्थित भारत के वायु सेना मुख्यालय की विंग कमांडर और
केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन अधिकारी ने संजय को जो सूचना दी है उसके
अनुसार देश ने साल २००७ में २, साल २००८ में १,साल २०१३ में ५,साल २०१६
में १ और चालू साल २०१७ के शुरुआती १० महीनों में ७ वायुसैनिक गवां दिए
हैं
देश भर में अपने तेजतर्रार रुख के लिए जाने जाने वाले समाजसेवी संजय
शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि उनको दी
गई सूचना से स्पष्ट है कि साल २००७ से २०१३ तक के पूर्ववर्ती
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंतिम ७ सालों में ८ वायुसैनिक शहीद हुए थे
जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरंभिक साढ़े तीन साल में ही ८
वायुसैनिक शहीद हो गए हैं l इस आधार पर संजय का कहना है कि अगर दोनों
प्रधानमंत्रियों के कार्यकालों की तुलना करें तो वर्तमान पीएम नरेंद्र
मोदी के कार्यकाल में देश के वायुसैनिकों के शहीद होने की दर पूर्व पीएम
मनमोहन सिंह के कार्यकाल की दर से दोगुनी हो गई है l

वायुसैनिकों के शहीद होने की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संजय ने
इन घटनाओं को देश की अपूर्णनीय क्षति बताया और देश के राष्ट्रपति और
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वायुसैनिकों के शहीद होने की दर के दोगुना
होने के कारणों की खोज करने के लिए जांच कराने और आवश्यक कदम उठाकर अनमोल
वायुसैनिकों के शहीद होने की दर को कम करने के आवश्यक उपाय करने की मांग
उठाने की बात भी इस स्वतंत्र पत्रकार से कही है

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10 सालों में 14415 जवान देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके- संजय शर्मा आरटीआई एक्सपर्ट

Posted on 11 December 2017 by admin

लखनऊ/10 दिसम्बर 2017

यूपी की राजधानी लखनऊ निवासी देश के जानेमाने आरटीआई एक्सपर्ट और
इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई अर्जी पर जवाब देते हुए भारतीय सेना ने
बताया है कि साल 2008 से लेकर इस साल बीते 01 नवम्बर तक बैटल कैजुअलटी
में 1228 और फिजिकल कैजुअलटी में 13187 जवान शहीद हो चुके हैं। इस तरह
पिछले 10 सालों में 14415 जवान देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर
कर चुके हैं l बीते सितंबर महीने में संजय शर्मा द्वारा रक्षा मंत्रालय
को भेजी गई आरटीआई एप्लीकेशन पर एकीकृत मुख्यालय रक्षा मंत्रालय ( सेना
) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते
13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक की है।

अपने प्राणों की परवाह न करते हुए देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के
साथ-साथ देश को अंदरूनी अंतर्द्वंदों से निजात दिलाने वाले सैनिकों को ही
रियल हीरो मानने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने यह आरटीआई अर्जी
देकर पिछले 10 सालों में सेना के अंगवार यानि कि थल सेना, जल सेना और
वायु सेना के ऑन ड्यूटी शहीद हुए सैनिकों की वर्षवार सूचना माँगी थी l
थल सेना ने संजय को सूचना दे दी है जबकि जल सेना और वायु सेना से सूचना
मिलना अभी शेष है l

आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि पिछले 10 सालों में बैटल कैजुअलटी
में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा 311 जवान साल 2008 में शहीद हुए और सबसे
कम 74 जवान साल 2013 में शहीद हुए l इस साल अब तक 81 जवान बैटल कैजुअलटी
में अपनी जान गवां चुके हैं l संजय को यह भी बताया गया है कि 10 सालों
में फिजिकल कैजुअलटी में किसी एक साल में सबसे ज्यादा 1530 जवान साल 2010
में शहीद हुए और सबसे कम 1250 जवान साल 2015 में शहीद हुए l इस साल अब तक
876 जवान फिजिकल कैजुअलटी में अपनी जान गवां चुके हैं l इस तरह इस आरटीआई
से यह खुलासा हुआ है कि पिछले 10 सालों में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा
1720 जवान साल 2010 में ऑन ड्यूटी शहीद हुए और सबसे कम 1359 जवान साल
2013 में ऑन ड्यूटी शहीद हुए l इस साल अब तक 957 जवान ऑन ड्यूटी अपनी जान
गवां चुके हैं l

मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय काम करने वाले और पेशे से
इंजीनियर संजय शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में
बताया कि इस प्रकार पिछले दस सालों में प्रतिवर्ष औसतन 123 जवान बैटल
कैजुअलटी में , 1319 जवान फिजिकल कैजुअलटी में और इस प्रकार कुल 1442
जवान ऑन ड्यूटी शहीद हो रहे हैं l संजय का कहना है कि इन आंकड़ों से
स्पष्ट है कि अगर साल 2016 को छोड़ दें तो साल 2012 से अब तक प्रतिवर्ष
शहीद होने वाले कुल सैनिकों की संख्या पिछले 10 सालों के औसत से कम रही
है l संजय के अनुसार उन्होंने आरटीआई इसलिए दायर की थी क्योंकि वे देश को
बताना चाहते थे कि देश को सुरक्षित रखने और देश में अमन चैन कायम रखने
के लिए आखिर हमें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है l

संजय को दी गई वर्षवार सूचना पर एक नज़र ->

Year Battle Casualty Physical Casualty Total
8 311 1323 1634
9 114 1464 1578
10 190 1530 1720
11 76 1423 1499
12 85 1350 1435
13 74 1285 1359
14 77 1307 1384
15 109 1250 1359
16 111 1379 1490
17 81 876 957
Total 1228 13187 14415

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बीते बुधवार हुए केन्द्रीय सूचना आयोग के
12वें वार्षिक सम्मेलन में “मामले से लेना-देना रखने वाले लोगों को ही
आरटीआई मांगने देने की प्रणाली विकसित करने” की बात करने के केंद्रीय
मंत्री जितेंद्र सिंह के बयान की भर्त्सना करते हुए एक्टिविस्ट संजय ने
कहा है कि मौका मिलने पर वे सिंह से इस सबाल का उत्तर जानना चाहेंगे कि
यदि उनकी मनचाही हुई तो क्या इस आरटीआई जैसी जनहित की आरटीआई दायर हो
पाएंगी और क्या तब सैनिकों की शौर्यगाथा के ऐसे खुलासे हो पाएंगे ?

संजय ने बताया है कि वे देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि
सैनिकों की साहसिक अमर गाथा की यह जानकारी सैनिकों के नाम के साथ नियमित
समय अंतराल पर जनता को सार्वजनिक तौर पर दी जाए ।

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