आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया: सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके। - इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू... 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.: महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी. - कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का... कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति: शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। - डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित... निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में: निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर - एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय - हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। - एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़... फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल: नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है। - आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से... जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति: नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी। - प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया। -... SC to appeal before itself on RTI row: New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act. - The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI. - The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary. - source :... तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना: सुलतानपुर14 फरवरी। 11 नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें - क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से। - क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में। - क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो का भुगतान सम्बन्धी विवरण। - क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण भुगतान का विवरण एवंसम्बन्धित नियमावली। - क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा...

निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में

निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने [...]

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चीनी मिल बिक्री पीआईएल में राज्य सरकार से जवाब तलब

11 May 2012

Allahabad High Court, Lucknow Bench admitted the Public Interest Litigation No 3640/2012 filed by RTI activist Nutan Thakur and ordered the State Government to file Counter Affidavit before the next date of listing. This order was given by the bench of Justice Uma Nath Singh and Justice V K Dixit. High Court fixed Mat 17, 2012 as the next date [...] Read the full story

Petition filed by Convener National RTI Forum

27 February 2012

In the Public Interest Litigation (PIL) Writ petition No 1574/2012 filed by Dr Nutan Thakur, Convener National RTI Forum, Lucknow in the Allahabad High Court, Lucknow bench, the double bench of Justice Umanath Singh and Justice Rituraj Awasthi has issued notice to the Central Bureau of Investigation (CBI) to present its position as regards the safeguards suggested to protect the [...] Read the full story

जनसूचना अधिकार अधिनियम की जिले में उड़ रही धज्जियाॅ

27 December 2011

वांछित सूचनाएं देने के बजाय दी जाती गोल मोल अधूरी सूचनाएं जन सूचना अधिकार अधिनियम की जमकर धज्जियां उडाई जा रही है। वांछित सूचनाएं देने के बजाय गोलमोल व अधूरी सूचनाएं देना विभाग के आदत में शुमार हो गया है। जिससे आवेदकों को मजबूरन सूचना आयोग की शरण लेनी पड़ती है। आयोग द्वारा अर्थदण्ड कें साथ [...] Read the full story

सूचना न देने पर केवल अधिकारी ही दोषी ही नहीं होंगे, इसके लिए लिपिक की भी बराबर की जिम्मेदारी मानी जाएगी

12 December 2011

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत तय समय सीमा के अंदर सूचना न देने पर केवल अधिकारी ही दोषी ही नहीं होंगे, इसके लिए लिपिक की भी बराबर की जिम्मेदारी मानी जाएगी। उसे भी अधिकारी के साथ जुर्माना की राशि अदा करना पड़ेगी। जन सूचना अधिकार में किसी भी तरह की सूचना अधिकतम तीस दिन के [...] Read the full story

उत्तर प्रदेश को एंटी करप्शन ओर्गेनाइजेशन में ही तैनात किये जाने सम्बन्धी

19 November 2011

श्री डी डी मिश्रा, डीआईजी, फायर सर्विस, उत्तर प्रदेश को एंटी करप्शन ओर्गेनाइजेशन में ही तैनात किये जाने सम्बन्धी उत्तर प्रदेश शासन के आदेश का सन्दर्भ ग्रहण करें. मैं आपको बताना चाह रही हूँ कि आपके इस आदेश का जनमानस में बहुत ही गलत सन्देश गया है. पारदर्शिता एवं उत्तदायित्व के क्षेत्र में कार्यरत लखनऊ [...] Read the full story

इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चयनित

08 February 2011

सामजिक कार्यकर्ता और नेशनल आरटीआई फोरम की कन्वेनर डॉ नूतन ठाकुर को अमेरकी सरकार के प्रतिष्ठित इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम के लिए चयनित किया गया है. यह अमेरिकी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसमे लोक प्रशासन, एनजीओ प्रशासक, अकादमिक क्षेत्र तथा मीडिया कर्मियों को अमेरिका में अमेरिकी शासकीय व्यवस्था की [...] Read the full story

कार्यशाला आयोजित

26 December 2010

जौनपुर। सिपाह स्थित आजाद शिक्षा केन्द्र पर सूचना का अधिकार अभियान द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका प्रमुख उद्देश्य सूचना के अधिकार कानून के प्रति स्वयं सेवी संस्थाओं को प्रशिक्षित कर समुदाय स्तर पर विभिन्न समस्याओं के प्रति जवाबदेही हेतु सूचना प्राप्ति को सरल तथा सुगम बनानें हेतु प्रयास करना था। कार्यक्रम के [...] Read the full story

प्रदेश में सतर्कता विभाग तथा उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को जन सूचना अधिनियम 2005 के प्रावधानों के बाहर कर दिया गया है

07 October 2010

लखनऊ।  सामाजिक कार्यकर्ता डा0 नूतन ठाकुर ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि  उत्तर प्रदेश में सतर्कता विभाग तथा उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को जन सूचना अधिनियम 2005 के प्रावधानों के बाहर कर दिया गया है. इसे जन सूचना अधिनियम 2005 की धारा 24 की उपधारा 4 के अधीन दी गई [...] Read the full story

विजली विभाग मे हो रहा करोड़ों का घपला

02 July 2010

सुल्तानपुर - सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 05 के अन्तर्गत बिजली विभाग ने करोड़ो के घपले का खुलासा करने की मांग की गई है, जिसमे विनय कुमार अधिशाशी अभियन्ता, एसडीओ आर0एस0 माथुर, अधिशाशी अभियन्ता के उपर आरोप लगाते हुए सूचना मांगी गई है कि 27 अप्रैल 06 को बुक नं0 038963, 21मार्च 2007 बुक नं0 [...] Read the full story

सूचना अधिकारी श्री अकील हैदर आज सेवानिवृत्त हुये

30 June 2010

लखनऊ - मुख्यमन्त्री कार्यालय से सम्बद्ध सूचना विभाग के सूचना अधिकारी श्री अक़ील हैदर आज सेवानिवृत्त हो गये हैं। विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों एवं समस्त सूचना अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। श्री हैदर ने सूचना विभाग में 1977 में अपनी सेवा प्रारम्भ की थी। अपने 33 वर्षो के कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण दायित्वों [...] Read the full story

लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए कामों की मांगी जानकारी जन सूचना अधिकार अधिनियम का किया प्रयोग

10 June 2010

चित्रकूट - जन सूचना अधिकार एक ऐसा हथियार है जिसका उपयोग कर सरकारी विभागों में अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किया जा रहे घोटाले का खुलासा करके कोई भी इनके खिलाफ कार्रवाई करवा सकता है। इसी हथियार का प्रयोग करते हुए मजदूर सभा के महासचिव ने लघु सिंचाई विभाग से कई बिन्दुओं पर जानकारी मांगी है। मजदूर [...] Read the full story

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                                         हर महिला पुरुष को दाम की गारंटी है""
महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
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