राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ पुस्तिका का विमोचन किया: सूचना के अधिकार से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा - राज्यपाल - उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन के गांधी सभागार में ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिष्ट, श्री विजय शंकर शर्मा, श्री पारसनाथ गुप्ता, श्री स्वदेश कुमार, श्री सैय्यद हैदर अब्बास रिज़वी, श्री हाफिज उस्मान, श्री राजकेश्वर सिंह, श्री गजेन्द्र यादव तथा उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश गर्ग, राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीर कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सहित अनेक गणमान्य... आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया: सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके। - इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू... 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.: महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी. - कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का... कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति: शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। - डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित... निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में: निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर - एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय - हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। - एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़... फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल: नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है। - आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से... जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति: नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी। - प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया। -... SC to appeal before itself on RTI row: New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act. - The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI. - The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary. - source :... तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना: सुलतानपुर14 फरवरी। 11 नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें - क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से। - क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में। - क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो का भुगतान सम्बन्धी विवरण। - क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण भुगतान का विवरण एवंसम्बन्धित नियमावली। - क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा...

Archive | Latest news

राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ पुस्तिका का विमोचन किया

Posted on 29 May 2017 by admin

सूचना के अधिकार से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा - राज्यपाल

aks_7539उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन के गांधी सभागार में ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिष्ट, श्री विजय शंकर शर्मा, श्री पारसनाथ गुप्ता, श्री स्वदेश कुमार, श्री सैय्यद हैदर अब्बास रिज़वी, श्री हाफिज उस्मान, श्री राजकेश्वर सिंह, श्री गजेन्द्र यादव तथा उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश गर्ग, राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीर कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। पुस्तिका का प्रकाशन उत्तर प्रदेश सूचना आयोग द्वारा किया गया है। पुस्तिका में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग द्वारा गत दो वर्षो में प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों का विवरण दिया गया है।
राज्यपाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सही अर्थोें में सूचना का अधिकार कानून एक क्रांतिकारी कदम है जिससे भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगाया जा सकता है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त सूचनाओं का उपयोग समाज के हित में होना चाहिये। सूचना के अधिकार का उपयोग दूसरों को परेशान करने की दृष्टि से किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सूचना आयोग अपने कार्य में दक्षता लाने के लिये विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग करें।
श्री नाईक ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य शासन एवं प्रशासन तंत्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रदेश में सुशासन की स्थापना में सूचना का अधिकार अधिनियम का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को जितने बेहतर तरीके से लागू किया जायेगा, प्रदेश में शासन व प्रशासन की कार्यप्रणाली में उतना अधिक सुधार आयेगा।
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी अधिनियम के क्रियान्वयन में नियमों की विशेष व्यवस्था होती है। नियम के बिना अधिनियम केवल लाईब्रेरी की शोभा हो सकते हैं। प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग द्वारा गत दो वर्षो में उठाये गये कदमों एवं उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के प्रख्यापन की सराहना भी की। उन्होेंने यह अपेक्षा व्यक्त की कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग, प्रदेश सरकार के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित करते हुए, आने वाले वर्षो में प्रदेश में इस अधिनियम को और भी प्रभावी तरीके से लागू करवायेगा।
श्री नाईक ने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से आयोग द्वारा अपने दो वर्षों का कार्यवृत्त प्रकाशित किया गया है। राज्यपाल ने बताया कि जवाबदेही और पारदर्शिता की दृष्टि से वे गत 38 वर्षों से जनता को अपना कार्यवृत्त प्रस्तुत करते आ रहे हैं। वे तीन बार विधायक तथा पांच बार सांसद रहे हैं। विधायक रहते हुये ‘विधान सभा में राम नाईक‘, सांसद रहते हुये ‘लोकसभा में राम नाईक’ एवं सांसद न रहने पर ‘लोकसेवा में राम नाईक’ तथा राज्यपाल बनने के बाद गत 2 वर्षों से ‘राजभवन में राम नाईक’ नाम से अपना कार्यवृत्त प्रस्तुत करते आ रहे हैं।
मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी ने देश में सुशासन की स्थापना के परिप्रेक्ष्य में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गत दो वर्षो में आयोग द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं, जिनके माध्यम से प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि जहाँ वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में लगभग 64,000 नयी अपीलें आयोग में दायर की गयी, वहीं इन दो वर्षो में आयोग द्वारा लगभग 72,000 अपीलों का निस्तारण किया गया। इस कारणवश आयोग में लम्बित अपीलों की संख्या गत दो वर्षो में लगभग 55,000 से घटकर 47,000 के स्तर पर आ गयी।
मुख्य सूचना आयुक्त ने यह भी बताया कि आयोग की पहल पर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा दिसम्बर, 2015 में उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 अनुमोदित एवं प्रख्यापित की गयी। इस नियमावली के लागू होने के उपरान्त प्रदेश में अधिनियम का क्रियान्वयन एकरुपता के साथ एवं सुव्यवस्थित तरीके से सम्भव हो सका है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 एवं उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के विभिन्न प्राविधानों के बारे में प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में कार्यरत लगभग 18,000 जन सूचना अधिकारियों के प्रशिक्षण का एक वृहद्व कार्यक्रम जनवरी, 2016 से प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के तहत लखनऊ मुख्यालय पर शासन एवं विभिन्न निदेशालयों में कार्यरत जन सूचना अधिकारियों के प्रशिक्षण के उपरान्त, प्रदेश के सभी 18 मण्डलों के मुख्यालयों पर प्रशिक्षण आयोजित किये गये, जिनमें प्रत्येक मण्डल के सभी जनपदों में कार्यरत जन सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की आवश्यकता को देखते हुये, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सतत रुप से जारी रहेगा।
मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा बताया गया कि सूचना आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली में सुधार लाने हेतु अनेक प्रभावी कदम उठाये गये हैं। आयोग में निबन्धन कार्यालय, अभिलेखागार तथा प्रतिलिपि अनुभाग का गठन किया गया है। आयोग द्वारा विभिन्न जन सूचना अधिकारियों पर लगाये गये अर्थदण्ड की वसूली सुनिश्चित करने हेतु, आयोग की पहल पर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा अर्थदण्ड की वसूली का अनुश्रवण करने की व्यवस्था स्थापित की गयी है।
मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि आयोग के कार्य को और अधिक दक्ष बनाने के दृष्टिकोण से सूचना प्रोद्योगिकी (Information Technology) का अधिक से अधिक प्रयोग सुनिश्चित किया गया है। आयोग में लम्बित सभी अपीलों का विवरण Electronic Case Information System (ECIS) पर दर्ज किया जा रहा है। आयोग की नई वेबसाइट भी बनायी गयी है, ताकि जनसाधारण को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, उ0प्र0 सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 एवं उत्तर प्रदेश सूचना आयोग से संबंधित आवश्यक सूचनाएं आसानी से प्राप्त हो सकें।
मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा यह भी बताया गया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करने हेतु इसी प्रकार के कदम उठाता रहेगा तथा उत्तर प्रदेश शासन के साथ समन्वय स्थापित करके यह प्रयास जारी रखेगा कि अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति हो सके।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में श्री स्वदेश कुमार, राज्य सूचना आयुक्त द्वारा राज्यपाल एवं अन्य गणमान्य अतिथिगण का स्वागत किया गया। श्री पारस नाथ गुप्ता, राज्य सूचना आयुक्त द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

Comments (0)

आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया

Posted on 01 April 2011 by admin

सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला  कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके।

01इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू कराने हेतु आमरण अनशन पर बैठने वाले समाजसेवी अन्ना हजारे के समर्थन में अभियान कार्यक्रम आय¨जित करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता गांपाल सिंह एवं संचालन रेनू सिह तथा ब्लाक प्रतिनिधि मुन्नी बेगम,नीलम सिंह, अनिल च©हान, देवेन्द्र कुमार सिंह, जनार्दन मिश्रा, निसार अहमद खान, भारत अटल,अकरम, सन्त¨ष, बलिराम आदि म©जूद रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

Comments (0)

‘सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.

Posted on 20 January 2011 by admin

महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा  ‘सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक  प्रभाव’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय  सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी.

कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि  सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का प्रयोग करना प्रारंभ करेगा।सूचना के अधिकार ने आज आम आदमी को उन लोगों से लड़ने की शक्ति दी है जिनसे लडने के बारे में वो कभी सोच भी नहीं सकता था।

manch_rti_2संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राज्य सूचना आयुक्त श्री वीरेन्द्र सक्सेना ने कहा कि  सूचना अधिकार कानून का एक सच ये भी है कि 75 प्रतिशत मामलों में आवेदनकर्ता को सूचना नहीं मिल पाती।सूचना का अधिकार कानून के प्रभावी होने में जनसूचना अधिकारियों की भूमिका अच्छी नहीं। इसके पीछे वजह यह है कि जनसूचना अधिकारियों को इस कानून और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में प्रभावी प्रशिक्षण नहीं दिया जाता  पत्रकार एवं सूचना अधिकार पर यूरोपियन के लोरेंजो नटाली प्रथम पुरस्कार प्राप्तकर्ता सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्री श्यामलाल यादव ने विस्तारपूर्वक बताया कि आज सूचना अधिकार से मीडिया को कितनी शक्ति मिल गयी है। उन्होंने मीडिया के लोगों से इसका अधिक से अधिक उपयोग करने तथा भ्रष्ट नेताओं एवं नौकरशाहों को बेनकाब करने की अपील की। पांचजन्य के सम्पादक बलदेव भाई शर्मा ने भी सूचना अधिकार पर अपने अनुभवों की चर्चा करते हुए सूचना अधिकार कानून 2005 भारत के सबसे बड़े क्रान्तिकारी कानून की संज्ञा दी। ये भी कहा कि देश में सिर्फ यही एक कानून है जो सरकारी मशीनरी को सामाजिक सरोकार पर मजबूर कर सकता है। डीडी न्यूज के  अनिल दुबे ने कहा कि  भ्रष्ट नेता और नौकरशाह इस कानून की धार कमजोर करने के प्रयास में लगातार लगे हैं मगर यदि जनता जागरूक रही तो उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पायेंगे।अध्यक्षता करते हुए महात्मा काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. अवध राम ने कहा कि कानून का उपयोग दूसरों को परेशान करने में न हो। जैसाकि अक्सर देखने में आता है। संस्थान के निदेशक एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के चेयरमैंन प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि इस कानून के आने के बाद आम आदमी मजबूत हुआ है भ्रष्टाचार के खिलाफ भी उसकी मुहीम को बल मिला हैं. सूचना के अधिकार की  सामजिक परिवर्तन में अहम् भूमिका हैं . सूचना का अधिकार लोकतंत्र  में आम आदमी के लिए एक हथियार  है.जिससे वह अपने हक की  लड़ाई  लड़ रहा  हैं.धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के डीन प्रो. राम मोहन पाठक ने किया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में  पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त ओम प्रकाश केजरीवाल ने बतौर मुख्य अतिथि कहा आरटीआई का शुल्क बढ़ाने की वकालत वो लोग करते हैं जो इस कानून के दुश्मन है या फिर वो नहीं चाहते कि आम आदमी के हाथों में इतना बड़ा हथियार हो।श्री केजरीवाल ने ये भी कहा कि लोग अब आरटीआई के दुरूपयोग की बात करते हैं। ऐसे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि देश में ऐसा कौन सा कानून है जिसका दुरूपयोग नहीं हो रहा है। मगर सिर्फ यही एक कानून है जिसका सबसे ज्यादा सदुपयोग हो रहा है। लाखों लोग इस कानून के जरिये सशक्त हुए हैं। आरटीआई  भ्रष्टचार के मामलों में आम आदमी को लड़ने की शक्ति देता है।

पत्रकार योगेश मिश्रा ने कहा कि आज सूचना आयोग में ऐसे लोग बैठाये जा रहे हैं जो खुद दागदार हैं। इस पर हम सभी को बारीक निगाह रखनी होगी। आरटीआई एक्टिविस्ट विष्णु राजगढ़िया ने कहा कि अब तक नौकरशाह सिर्फ इसलिए हम पर हावी थी क्योंकि उनके पास कानूनी अधिकार के रूप में हथियार होते थे। मगर आरटीआई के रूप मे अब आम आदमी को भी संविधान ने एक खतरनाक अधिकार दे दिया है तो नौकरशाह परेशान हैं। वो इस हथियार की धार को कुंद करना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता अशोक मेहता ने देश, समाज और मीडिया में भ्रष्टाचार के मामलों की विस्तार से चर्चा की। कहा, आरटीआई अभी एक ही पक्ष को कंट्रोल कर पा रहा है जबकि इसके दायरे में सब कुछ आना चाहिए।

बीएचयू पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो0 एच0ए0 आजमी ने कहा कि यदि हमारे पास सही सूचनाएं हो तो हम ज्यादा अच्छा निर्णय ले सकते हैं। जो सूचनाओं से दूर होता है, उसका नुकसान होता है। इतिहास भी इसका गवाह है। उन्होंने कहा कि कहीं-कहीं मीडिया भी स्वत सूचनाओं के रास्ते में रोड़ा बन रही है जो ठीक नहीं। पी0टी0आई0 झारखण्ड के प्रमुख इंदु कांत दीक्षित ने नई दिल्ली की संस्था पीसीआरएफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सूचना आयेाग में सूचना न देने के मामलों में से सिर्फ 3 ़17 प्रतिशत मामलों में ही दोषी अधिकारियों पर पेनाल्टी लगाई गयी। क्या इसी तरह सूचना अधिकार का भला हो रहा है। प्रेस काउंसिल के सदस्य एवं जनमोर्चा के सम्पादक शीतला सिंह ने कहा कि यदि समाज से भ्रष्टाचार को मिटाना है तो सबसे पहले हमें खुद को सुधारना होगा। ऐसा होता है तो शायद हमें किसी कानून की जरूरत न पड़े।

सेमिनार में चार सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें आठ राज्यों के 25 विश्वविद्यालयों के करीब 400 लोगों ने प्रतिभाग किया  22 सोर्स परसन के रूप में आमंत्रित रहे।दो दिन की गतिविधियों में मुख्य रूप से  प्रो. बी.आर. गुप्ता,   प्रो. वीरेन्द्र व्यास,  प्रो. हरीश कुमार, डा. देवेन्द्र नाथ सिंह,  वशिष्ठ नारायण सिंह ,भड़ास डाट काम के यशवंत सिंह,डा. आनंद प्रधान ,प्रेस काउंसिल सदस्य सुमन गुप्ता,डॉ गोपाल सिंह, डा. गोविन्द जी पाण्डेय, डॉ अरविन्द सिंह ,डॉ अवध बिहारी सिंह , कौशल कुमार पाण्डेय,विभव कुमार ,डॉ उमेश पाठक, डा. दुर्गेश त्रिपाठी डा. विवेक कुमार सिंह, डा. अरविन्द, डा. राजेन्द्र सिंह, डा. धर्मेन्द्र पटेल, आशीमा सिंह गुरेजा, साधना श्रीवास्तव, शशांक शेखर चतुर्वेदी, जिनेश कुमार, दिग्विजय सिंह राठौर, आशीष त्रिपाठी , डा. प्रतिभा शर्मा,नागेन्द्र प्रताप सिंह आदि ने विभिन्न गतिविधियों में शिरकत की.

दिग्विजय सिंह राठौर ,प्रवक्ता, जनसंचार  विभाग
पूर्वांचल विद्यालय जौनपुर. 9415840877

Comments (0)

कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति

Posted on 21 May 2010 by admin

शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है।

डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित हों।

डॉ. अंसारी ने कहा कि कोई भी संस्था जो सूचना के अधिकार के दायरे में आती है, उसे कैग के ऑडिट के अधीन भी लाया जाना चाहिए। पब्लिक ऑडिट का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब रिकॉर्ड को निर्धारित समयसीमा में बिना बाधा के मुहैया कराया जाता है।

Comments (0)

निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में

Posted on 22 April 2010 by admin

निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर

एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय

हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था।

एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़ वाटर शार्टेज फंड शामिल है। परियोजना को वित्तीय दृष्टि से

-सिराज केसर

ब्लू-ग्रीन मीडिया
47 प्रताप नगर, इंडियन बैंक के पीछे
कीड्स होम के ऊपर, मयूर विहार फेज 1, दिल्ली - 91
मो- 9211530510
hindi.indiawaterportal.org

Comments (0)

फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल

Posted on 19 March 2010 by admin

नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है।

आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से यह जानना चाहा था कि क्या उसने केन्द्रीय गृहमन्त्रालय को पद्म पुरस्कारों के सिलसिले में कोई समिति गठित करने का निर्देश दिया है। शीर्ष न्यायालय ने उन्हें यह जानकारी देने से इनकार कर दिया।

देवदत्त कामत इसी मामले में सीआईसी में सुप्रीम कोर्ट का पक्ष रख रहे थे। कामत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने पद्म पुरस्कारों के बारे में निर्णय लेने के लिए विख्यात लोगों की एक समिति गठित करने का सुझाव दिया। मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि देवदत्त कामत ने आरटीआई आवेदक के सवाल का जवाब दे दिया है।

Comments (0)

जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति

Posted on 13 March 2010 by admin

नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया।

अग्रवाल ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की पदोन्नति के प्रस्ताव को विधि मन्त्रालय द्वारा कोलेजियम को लौटाने के परिप्रेक्ष्य में यह जानकारी मांगी थी। प्रथम अपीली प्राधिकार तथा संयुक्त सचिव रमेश अभिषेक ने कहा कि केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने आवेदनकर्ता को सूचित किया कि ऐसी कोई सूची रखने की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा इस बारे में कोई सूचना नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है कि किसी अन्य प्राधिकार के पास ऐसी सूचना है अथवा नहीं।

Comments (0)

SC to appeal before itself on RTI row

Posted on 07 March 2010 by admin

New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act.

The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI.

The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary.

source : PTI

Comments (0)

तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना

Posted on 14 February 2010 by admin

सुलतानपुर14 फरवरी।  11  नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से  जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें

क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से।
क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में।
क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो
का भुगतान सम्बन्धी विवरण।
क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण
भुगतान का विवरण एवं सम्बन्धित नियमावली।
क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा सहित।

11 नवम्बर को मांगी सूचना आसज तक उपलब्ध नहीं हो सकी। 20 नवम्बर2009 को मुख्य विकास अधिकारी द्वारा एक पत्र प्राप्त अवश्य हुआ है जिसमें उन्होंने परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को इस आशय का एक पत्र लिखा है कि जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के प्राथ्र्सना पत्र दिनांक 11.11 09 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम,200भ् के तहत सूचना की मांग किया गया है। उक्त प्रार्थना पत्र अधिनियम की धारा 6,3 के अन्तर्गत आन्तरित करते हुए मूल रूप में संलग्न कर आपके पास इस आशय के साथ प्रषित किया जा रहा है कि कृपया सम्बन्धित को अपने स्तर से वांछित सूचना उपलब्ध कराने का कष्ट करें लिख कर अपने दायित्व को पूरा कर लिया ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

Comments (0)

Advertise Here
Advertise Here
-->



 Type in