राज्यपाल ने ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ पुस्तिका का विमोचन किया: सूचना के अधिकार से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर अंकुश लगेगा - राज्यपाल - उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज राजभवन के गांधी सभागार में ‘उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के बढ़ते कदम’ नामक पुस्तिका का विमोचन किया। समारोह में उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिष्ट, श्री विजय शंकर शर्मा, श्री पारसनाथ गुप्ता, श्री स्वदेश कुमार, श्री सैय्यद हैदर अब्बास रिज़वी, श्री हाफिज उस्मान, श्री राजकेश्वर सिंह, श्री गजेन्द्र यादव तथा उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश गर्ग, राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीर कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण सहित अनेक गणमान्य... आरटीआई के 25 आवेदन कार्यक्रम अधिकारी को दिया: सूचना का अधिकार अभियान द्वारा सूचना के अधिकारा एवं जनल¨कपाल बिल के समर्थन एवं कार्यवाही हेतु कार्यक्रम विकास भवन परिसर में आय¨जित किया गया। इस अवसर पर कुल 25 आवेदन जिला कार्यक्रम क¨ अधिकारी क¨ दिया गया। जिसमें आंगनवाड़ी सहित इस विभाग की तमाम य¨जनाअ¨ं के बारे में जानकारी मांगी गयी। ताकि इसका भैतिक सत्यापन कर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सके। - इस म©के पर वक्ताअ¨ं ने कहा कि बीते 24 फरवरी क¨ जिला पंचायत राजअधिकारी क¨ 25 आवेदन प्रेषित किया गया लेकिन आज तक उसकी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी। जबकि कानून में 30 दिन के भीतर सूचना देने का प्रावधान है। इस बाबत जिला पंचायत राजअधिकारी से पूछे जाने पर पहले त¨ आनाकानी किया लेकिन पि र एक सप्ताह के अन्दर सूचना देने की बात स्वीकारी। आवेदन के पश्चात के ब्लाक¨ं के प्रमिनिधिय¨ं ने निर्णय किया कि आगामी 5 अप्रैल क¨ जनल¨कपाल विधेयक क¨ लागू... 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को किया गया.: महामना मदन मोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ पीठ वाराणसी द्वारा 'सूचना का अधिकार २००५ के सामाजिक प्रभाव' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन १५ -१६ जनवरी को विश्वविद्यालय में किया गया. दो दिवसीय सेमिनार में सूचना के अधिकार का विकास,भारतीय लोकतंत्र में योगदान, सूचना का अधिकार और भारत में भ्रष्टाचार,सामाजिक परिवर्तन और सूचना का अधिकार, सूचना का अधिकार और गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका, सूचना का अधिकार एवं जनमाध्यम आदि विषयो पर चर्चा की गयी. - कार्यक्रम के उदघाटन सत्र मे बतौर मुख्य अतिथि इन्दरा गांधी केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति प्रो. सी.डी. सिंह ने सूचना अधिकार कानून को देश का सबसे महत्वपूर्ण कानून माना। कहा कि सूचना का अधिकार कानून तब मजबूत कहा जायेगा जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस अधिकार का... कैग के ऑडिट दायरे में आएं एनजीओ - उपराष्ट्रपति: शिमला में राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के डायमंड जुबली समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने कहा है कि आरटीआई एक्ट के अधीन आने वाली सभी संस्थाओं, एनजीओ, सोसाइटी और ट्रस्ट को भी कैग के ऑडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए। वर्तमान में 1971 एक्ट के तहत इन सभी संस्थाओं को कैग के ऑडिट के तहत लाए जाने का प्रावधान नहीं है। पब्लिक ऑडिट की प्रकिया में कई सुधार किए जाने की आवश्यकता अभी भी महसूस की जा रही है। - डॉ. अंसारी ने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए तो जनता को सुशासन मुहैया कराया जा सकता है। अभी कैग के पास ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे वह राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को समन जारी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। कैग के अधीन ऐसी संवैधानिक बॉडी का गठन किया जाना चाहिए जिसके पास ऐसे अधिकार निहित... निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में: निजी कंपनी भी हो सकती है सूचना-अधिकार के दायरे में, अगर - एनटीएडीसीएल सूचना-अधिकार के दायरे में : मद्रास उच्च न्यायालय - हाल ही में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजना से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा न्यू तिरुपुर एरिया डिवेलपमट कार्पोरेशन लिमिटेड, (एनटीएडीसीएल) की याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी ने यह याचिका तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी जिसमें आयोग ने कंपनी को मंथन अध्ययन केन्द्र द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। - एक हजार करोड़ की लागत वाली एनटीएडीसीएल देश की पहली ऐसी जलप्रदाय परियोजना थी जिसे प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत मार्च 2004 में प्रारंभ किया गया था। परियोजना में काफी सारे सार्वजनिक संसाधन लगे हैं जिनमें 50 करोड़ अंशपूजी, 25 करोड़ कर्ज, 50 करोड़ कर्ज भुगतान की गारंटी, 71 करोड़... फैसलों से जुड़े सवालों का जवाब देना मुश्किल: नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरटीआई के मामलों को देख रहे उसके अधिकारियों से शीर्ष अदालत के फैसलों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब की उम्मीद नहीं की जा सकती ,क्योकि उनके पास सीमित संसाधन हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील देवदत्त कामत ने केन्द्रीय सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कहा कि जहां तक केन्द्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सी.पी.आई.ओ) की बात है तो उनके लिए फैसलों पर कोई टिप्पणी कर पाना या इस बात की जानकारी देना बहुत मुश्किल होगा कि फैसले में ऐसा हुआ है या नहीं। यह काम वकील का है। कामत ने कहा कि सी.पी.आई.ओ के पास सीमित संसाधन और आधारभूत सुविधाएं है। - आरटीआई कानून के तहत रजिस्ट्री में जो उपलब्ध है, निश्चित रूप से वह देगा, लेकिन अगर इस अनुरोध को मान लिया गया तो हम कई परेशानियों में फंस जाएंगे। आरटीआई आवेदक सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट से... जजों की पदोन्नति पर आपत्ति सम्बंधी सूचना देने मे आपत्ति: नई दिल्ली - सरकार ने उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश के पद पर प्रोन्नति के लिए भेजे गए उन जजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम पर राष्ट्रपति ने आपत्ति प्रकट की है। अब इस मामले पर केन्द्रीय सूचना आयोग को फैसला करना है। इस बारे में सूचना सामाजिक कार्यकर्ता एस.सी अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आर.टी.आई) के तहत मांगी थी। - प्राप्त जानकारी के अनुसार अग्रवाल के आवेदन पर केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी ने कहा था कि मन्त्रालय के पास ऐसी कोई सूची नहीं है। यह आवेदन राष्ट्रपति सचिवालय के पास पहुंचा थाए जहां से इसे जवाब देने के लिए मन्त्रालय के पास भेज दिया गया था। आवेदन में पूछा गया था कि उच्चतम न्यायालय के लिए अथवा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदों पर प्रोन्नति के लिए किन जजों का नाम कम से कम एक बारं लौटाया गया। -... SC to appeal before itself on RTI row: New Delhi - The Supreme Court would file an appeal before itself in the next few days challenging the judgement of Delhi High Court holding that the office of the Chief Justice of India came under the ambit of the RTI Act. - The appeal, though drafted more than a month ago, could not be brought on record before the registry due to a technical glitch but the same would be formalised after the court reopens on Monday after a week-long Holi recess, official sources told PTI. - The sources said that CJI K G Balakrishnan had consultations with other apex court judges on the issue and the grounds taken by it in the appeal are identical to the stand taken in the High Court that disclosure of information held by the CJI would hamper independence of judiciary. - source :... तीन माह बाद भी नहीं मिली जन सूचना अधिकार के तहत सूचना -मुख्य विकास अधिकारी से मांगी गई थी सूचना: सुलतानपुर14 फरवरी। 11 नवम्बर 2009 को राहत टाइम्स के जिला संबाददाता ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ियो के तहत मुख्य विकास अधिकारी से जानकारी मांगी थी परन्तु तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक सूचनाएं नहीं मुहैया कराई गई। सूचनाओं के अन्तर्गत जो जानकारी मांगी गई थी उसमें जो सूचनाएं हैं उसमें - क्रमाक 1.पर मनरेगा का वार्षिक बजट का आबंटन योजना आरंभ से। - क्र0न.2 कान्टीजेन्सी में ग्राम पंचायतों में वितरित किए गये सामगि्रयों का विवरण- वित्तीयवर्षों के अनुक्रम में। - क्र0 न.3-वितरित किए सामग्रियो का भुगतान सम्बन्धी विवरण। - क्र0सं04-मनरेगा कानून के अन्तर्गत उपलब्ध नियुक्ति कर्मचारियों के मानदेय का मॉग, लिए गये कार्यका विवरण भुगतान का विवरण एवंसम्बन्धित नियमावली। - क्र0संभ् वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में उपल्ब्ध धनराशि एवं ग्राम पंचायतों को धन राशि का आबटंन कानून के अनुसार समीक्षा...

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यूपी : RTI एक्टिविस्टों ने सूचना आयुक्तों पर भ्रष्टाचार,अक्षमता का लगाया आरोप,उठाई राज्यपाल की 303 सिफारिशों के आधार पर आयुक्तों को हटाने की मांग

Posted on 22 April 2017 by admin

सूबे में सत्ता का हस्तांतरण अखिलेश यादव से योगी आदित्यनाथ को होने के बाद नए सीएम योगी के की साफ-सफाई की मुहिम के चलते अखिलेश के कार्यकाल में किये गये काले कारनामों के छुपे हुए कंकाल और नरमुंड एक-एक कर सरकारी अलमारियों से बाहर आने लगे हैं l फिर चाहें वह आवास विभाग हो , लोक निर्माण विभाग हो , सिंचाई विभाग हो या और कोई विभाग; कोई भी विभाग ऐसा नहीं दिख रहा है जो अखिलेश के समय में भ्रष्टाचार से अछूता रहा हो l इसी बीच सूबे के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव पर राजनैतिक लाभ लेने के लिए अक्षम और अयोग्य व्यक्तियों को राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों जैसा महत्वपूर्ण पद रेवड़ियों की तरह बांटने का आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी और बाकी सभी 8 आयुक्तों पर सूचना आयोग में बैठकर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए आज राजधानी लखनऊ में समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में धरना देकर अपनी 2 मांगें बुलंद की हैं l

18010462_10212455701810323_10607838411146614_nधरने की आयोजिका उर्वशी शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस धरने का आयोजन सूचना आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को समाप्त कराकर नागरिकों को निर्वाध रूप से आरटीआई प्रयोग करने के संवैधानिक दायित्व को पूरा करने के लिए पर्याप्त अवसर दिलाने के वृहद् लोकहित को पूरा कराने के लिए किया है l उर्वशी ने बताया कि आरटीआई एक्ट की प्रस्तावना में ही नागरिकों को दायित्व दिया गया है कि वे इस जानने के अधिकार का प्रयोग करें और गवर्नेंस में सहभागिता कर भारत के लोकतंत्र को मजबूती दें परन्तु उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में वर्तमान कार्यरत मुख्य सूचना आयुक्त और सभी सूचना आयुक्तों में एक्ट का ज्ञान न होने; एक्ट, नियमावली और सामान्य कानूनों की सामान्य समझ भी न होने; अपने कार्यों के प्रति वफादारी की कमी होने;अपने मालिक अर्थात देश के नागरिकों के प्रति वफादारी की कमी होने ;कार्य समय में पदीय कार्य न करके व्यक्तिगत कार्य करने की आदत होने; अपने मालिक अर्थात देश के नागरिकों का दिया काम पूरा न करने की आदत होने;राजकोष में सेंध लगाकर भ्रष्टाचार करने और व्यय का हिसाब न देने;अधिकतर बिना बताये छुट्टी पर रहने की आदत होने और कार्य करते समय भेदभाव करने की आदत होने के कारण नागरिक आरटीआई प्रयोग करने के अपने संवैधानिक दायित्व का पूर्ण अनुपालन नहीं कर पा रहे हैं और आयोग में निरंतर ही उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है l बकौल उर्वशी उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के सभी क्रियाकलाप भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की गिरफ्त में हैं जिनके प्रमाण उनके पास हैं l

कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले एक्टिविस्टों ने जिला प्रशासन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, यूपी के राज्यपाल और यूपी के मुख्यमंत्री को संबोधित संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित 3 ज्ञापन प्रेषित कर उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों के खिलाफ राज्यपाल द्वारा अनुशंषा कर उत्तर प्रदेश शासन के प्रशासनिक सुधार विभाग को अग्रसारित किये गये 303 प्रकरणों को तत्काल माननीय उच्चतम न्यायालय को प्रेषित कर इन सभी प्रकरणों का निस्तारण आरटीआई एक्ट की धारा 17 के अनुसार कराकर यथावश्यक दंडात्मक कार्यवाही कराये जाने और राज्य सूचना आयोग में खाली पड़े दो पदों पर आरटीआई कानून का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले समाज के प्रख्यात व्यक्तियों की नियुक्ति माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नमित शर्मा प्रकरण के आदेश में निर्धारित की गई प्रक्रिया का अक्षरशः अनुपालन कर पूर्णतया पारदर्शी रीति से किये जाने की 2 मांगें बुलंद कीं l

धरने का समर्थन कर रहे ‘सूचना का अधिकार बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तनवीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि आने वाले कल यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने आरटीआई कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर वार्ता हेतु उनके संगठन के प्रतिनिधिमंडल से व्यक्तिगत भेंट हेतु समय दिया है जिसके लिए उनके और उनके संगठन की संरक्षिका उर्वशी शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में संगठन का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से भेंट कर उनको RTI कार्यकर्ताओं की समस्याओं से रूबरू कराएगा और इन समस्याओं के समाधान की अपील करेगा l

अशोक कुमार गोयल, हरपाल सिंह,होमेंद्र कुमार मिश्रा,आनंद प्रसाद, ज्ञानेश पाण्डेय,संजय आजाद,सैयद नईम अहमद , सुखदेव तिवारी, इकरार अंसारी आदि लखनऊ के प्रतिष्ठित नागरिकों ने भी उर्वशी के धरने का समर्थन किया l

उर्वशी ने बताया कि उनको आशा है कि सीएम योगी आरटीआई कार्यकर्ताओं की दोनों मांगे को अवश्य पूरा करेंगे l

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